जुल्म के सामने चुप रहल
48
जुल्म के सामने चुप रहल
ई त जियते-जियत बा मरल
साँच के साथ देवे बदे
खुद से अक्सर लड़े के पड़ल
पाँव में हमरा काँटा चुभल
दर्द उनका हिया में उठल
हमरे रोपल रहल जंग ई
हमरे कीमत भरे के पड़ल
भीखमंगा सड़क पर सुतल
जइसे बालू प मछरी पड़ल
जेके पत्थर में खोजत रहीं ऊ
त धड़कन में हमरा मिलल
अब त 'भावुक' हो तहरा बिना
दू कदम भी बा मुश्किल चलल
Home
जुल्म के सामने चुप रहल
ई त जियते-जियत बा मरल
साँच के साथ देवे बदे
खुद से अक्सर लड़े के पड़ल
पाँव में हमरा काँटा चुभल
दर्द उनका हिया में उठल
हमरे रोपल रहल जंग ई
हमरे कीमत भरे के पड़ल
भीखमंगा सड़क पर सुतल
जइसे बालू प मछरी पड़ल
जेके पत्थर में खोजत रहीं ऊ
त धड़कन में हमरा मिलल
अब त 'भावुक' हो तहरा बिना
दू कदम भी बा मुश्किल चलल
Home
0 Comments:
Post a Comment
<< Home